Saturday, September 22, 2018

हाइकु -

ये कैसे पर
दिल में हलचल
तुम्हारे बिना 

-डा० संजय कुमार सराठे

हाइकु -

ढलती रात
दरिया से कहती
विदा ले हम

-डा० संजय कुमार सराठे

हाइकु -

समय चक्र
बदलती दुनिया
मानव कहां ?

-डा० संजय कुमार सराठे

हाइकु -

बिना अधूरी
सोलह श्रृंगार के
चॉंदनी रात

-डा० संजय कुमार सराठे

Sunday, June 24, 2007

परिचय



Dr. Sanjay Sarathe

डा० संजय कुमार सराठे
Dr. Sanjay Kumar Sarathe

TGT (HINDI)
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हिन्दी)
J.N.V. BETUL  (M.P.)
जवाहर नवोदय विद्यालय, बैतूल [म०प्र०]
मोबा. 7000082409
email -
talksanjaysarathe@gmail.com

नीर कणों ने

नीर कणों ने
बिखेर दिया जादू
भू-मंच पर

-डा० संजय कुमार सराठे

Friday, March 10, 2006

आओ मनाएँ होली

बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली
बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली !

सूखे पलाश ने गुपचुप-गुपचुप
फैला दी रंगों की झोली,
बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली !

इतराते आमों पर सौंधी खुशबू
बौरों की लगी बिखरने चोली,
बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली !


पप्पू-मुन्नी रीना-टीना मनाए खुशियाँ
पिचकारी भर-भर रगों की गोली,
बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली !


क्ल-कल झरना बोला-कहाँ चली
ओ पवन मतवाली लेकर अपनी टोली,
बासंती परिवेश मे आओ मनाएँ होली !


भेदभाव को छोड़ हम मिल जुलकर
तिलक करें अटूट रिश्तों की रोली,
बासंती परिवेश में आओ मनाएँ होली !




-डा० संजय कुमार सराठे



तुम याद आना

तुम याद आना
यादों के समंदर में
आँसू सी लहर बन
मन की कोमल बगिया के
तरु को सिंचित कर
प्रीति के सुमन खिला जाना
तुम याद आना तुम याद आना

घोर अँधेरी रातों में
जुगुनू–सी चमक बन
नीरवता के वितान में
पायल की झनकार से
मधुमय अहसास दिला जाना
तुम याद आना
तुम याद आना


***


-डा० संजय कुमार सराठे